20 अगस्त, 2021

देश हमें देता है सब कुछ, हम भी तो कुछ देना सीखें

गुरु दक्षिणा कार्यक्रम में गाए जाने वाले गीतों में से एक गीत यह भी है। 


इस गीत का भाव यह है की प्रकृति का प्रत्येक अंग कुछ ना कुछ हमें हर पल दे ही रहा है और हमसे कुछ लेने की उम्मीद भी नहीं कर रहा है, इसी प्रकार प्रकृति से सीखते हुए हम भी इस देश को, इस समाज को, अपने राष्ट्र को, अपने गांव को, कुछ देना सीखे।


 हम अपने स्वार्थ में ही ना खो जाए।





 देश हमें देता है सब कुछ, हम भी तो कुछ देना सीखें ॥धृ॥


सूरज हमें रौशनी देताहवा नया जीवन देती है  
भूख मिटने को हम सबकीधरती पर होती खेती है 
औरों का भी हित हो जिसमेंहम ऐसा कुछ करना सीखें ॥१॥

गरमी की तपती दुपहर मेंपेड़ सदा देते हैं छाया 
सुमन सुगंध सदा देते हैंहम सबको फूलों की माला 
त्यागी तरुओं के जीवन सेहम परहित कुछ करना सीखें ॥२॥

जो अनपढ़ हैं उन्हें पढ़ाएँ , जो चुप हैं उनको वाणी दें 
पिछड़ गए जो उन्हें बढ़ाएँसमरसता का भाव जगा दें 
हम मेहनत के दीप जलाकरनया उजाला करना सीखें ॥३॥

देश हमें देता है सब कुछ, हम भी तो कुछ देना सीखें

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