17 अप्रैल, 2025

राष्ट्र की जय चेतना का गान वंदे मातरम्



गीत - राष्ट्र की जय चेतना का गान वंदे मातरम्



 राष्ट्र की जय चेतना का गान वंदे मातरम्, 

राष्ट्रभक्ति प्रेरणा का गान वंदे मातरम्।। 

वंदे मातरम् …. 



वंशी के बहते स्वरों का प्राण वंदे मातरम्, 

झल्लरी झनकार झनके नाद वंदे मातरम्, 

शंख के संघोष का संदेश वंदे मातरम्।।1।। 


सृष्टि बीज मंत्र  का है मर्म वन्दे मातरम्, 

राम के वनवास का काव्य है वंदे मातरम्, 

दिव्य गीता ज्ञान का संगीत वंदे मातरम्।।2।। 


हल्दीघाटी के कणों में व्याप्त वंदे मातरम्, 

दिव्य जौहर ज्वाल का है तेज वंदे मातरम्, 

वीरों के बलिदान की हुंकार वंदे मातरम्।।3।। 


जन-जन के हर कंठ का हो गान वंदे मातरम्, 

अरिदल थर-थर काँपे सुनकर नाद वंदे मातरम्, 

वीर पुत्रों की अमर ललकार वंदे मातरम्।।4।।



धन्यवाद!



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25 अगस्त, 2021

राष्ट्र की जय चेतना का गान वंदे मातरम्




राष्ट्र की जय चेतना का गान वंदे मातरम्
राष्ट्रभक्ति प्रेरणा का गान वंदे मातरम्

बंसी के बहते स्वरोंका प्राण वंदे मातरम्
झल्लरि झनकार झनके नाद वंदे मातरम्
शंख के संघोष का संदेश वंदे मातरम् ॥१॥

सृष्टी बीज मंत्र का है मर्म वंदे मातरम्
राम के वनवास का है काव्य वंदे मातरम्
दिव्य गीता ज्ञान का संगीत वंदे मातरम् ॥२॥

हल्दिघाटी के कणोमे व्याप्त वंदे मातरम्
दिव्य जौहर ज्वाल का है तेज वंदे मातरम्
वीरोंके बलिदान का हूंकार वंदे मातरम् ॥३॥

जनजन के हर कंठ का हो गान वंदे मातरम्
अरिदल थरथर कांपे सुनकर नाद वंदे मातरम्

वीर पुत्रोकी अमर ललकार वंदे मातरम् ॥४॥ 

20 अगस्त, 2021

मनुष्य तू बडा़ महान है




 धरती की शान तू है,मनु की संतान,

तेरी मुठ्ठियों मे बंद तूफान है रे,
मनुष्य तू बडा महान है,
भूल मत मनुष्य तू बडा़ महान है।।

तू जो चाहे पर्वत पहाडो को फोड दे,
तू जो चाहे नदियों के मुख को भी मोड दे,
तू जो चाहे पर्वत पहाडो को फोड दे,
तू जो चाहे नदियों के मुख को भी मोड दे,

तू जो चाहे माटी से अमृत निचोड़ दे,
तू जो चाहे धरती को अंबर से जोड दे,
अमर तेरे प्राण अमर तेरे प्राण,
मिला तुझको वरदान,
तेरी आत्मा मे रे तेरी आत्मा मे स्वयं भगवान है,
तेरी आत्मा मे स्वयं भगवान है रे,
मनुष्य तु बड़ा महान है,
भूल मत मनुष्य तु बड़ा महान है ।।

नैनो मे ज्वाल तेरी गत मे भुचाल,
तेरी छाती मे छुपा महाकाल है,
नैनो मे ज्वाल तेरी गत मे भुचाल,
तेरी छाती मे छुपा महाकाल है,

पृथ्वी के लाल तेरी हिमगिरि सा भाग,
तेरी भ्रकुटी मे तांडव का ताल है,
निज को तू रे
निज को तू जान निज को तू जान,
जरा शक्ति पहचान,
ओ तेरी वाणी में ओ तेरी वाणी मे,
युग का अहवान है रे,
मनुष्य तु बड़ा महान है,
भूल मत मनुष्य तू बड़ा महान है।।

धरती सा भी तू है अग्नि सा भी,
तू जो चाहे काल को भी थाम ले,
धरती सा भी तू है अग्नि सा भी,
तू जो चाहे काल को भी थाम ले,

पापो का प्रलय रूके पशुता का शिश झुके,
तू जो चाहे हिम्मत से काम ले,
गुरू सा मतीमान गुरू सा मतीमान,
पवन सा तू गतीमान,
ओ तेरी नभ से रे तेरी नभ से भी ऊंची उडान है,
ओ तेरी नब से भी ऊंची उडान है रे,
मनुष्य तू बड़ा महान है,
भूल मत मनुष्य तू बड़ा महान है।।

धरती की शान तू है,मनु की संतान,
तेरी मुठ्ठियों मे बंद तूफान है रे,
मनुष्य तू बडा महान है,
भूल मत मनुष्य, तू बडा़ महान है।।

देश हमें देता है सब कुछ, हम भी तो कुछ देना सीखें

गुरु दक्षिणा कार्यक्रम में गाए जाने वाले गीतों में से एक गीत यह भी है। 


इस गीत का भाव यह है की प्रकृति का प्रत्येक अंग कुछ ना कुछ हमें हर पल दे ही रहा है और हमसे कुछ लेने की उम्मीद भी नहीं कर रहा है, इसी प्रकार प्रकृति से सीखते हुए हम भी इस देश को, इस समाज को, अपने राष्ट्र को, अपने गांव को, कुछ देना सीखे।


 हम अपने स्वार्थ में ही ना खो जाए।





 देश हमें देता है सब कुछ, हम भी तो कुछ देना सीखें ॥धृ॥


सूरज हमें रौशनी देताहवा नया जीवन देती है  
भूख मिटने को हम सबकीधरती पर होती खेती है 
औरों का भी हित हो जिसमेंहम ऐसा कुछ करना सीखें ॥१॥

गरमी की तपती दुपहर मेंपेड़ सदा देते हैं छाया 
सुमन सुगंध सदा देते हैंहम सबको फूलों की माला 
त्यागी तरुओं के जीवन सेहम परहित कुछ करना सीखें ॥२॥

जो अनपढ़ हैं उन्हें पढ़ाएँ , जो चुप हैं उनको वाणी दें 
पिछड़ गए जो उन्हें बढ़ाएँसमरसता का भाव जगा दें 
हम मेहनत के दीप जलाकरनया उजाला करना सीखें ॥३॥

देश हमें देता है सब कुछ, हम भी तो कुछ देना सीखें

स्वयंसेवकों का यही एक सपना, बने कार्यकर्ता बढे देश अपना

इस गीत में स्वयंसेवकों के अंदर क्या क्या गुण होना चाहिए उसका वर्णन मिलता हैं। हम सभी स्वयंसेवक के नाते प्रयास करें की इन सभी गुणों को आत्मसात करें।





 स्वयंसेवकों का यही एक सपना,

बने कार्यकर्ता बढे देश अपना।


कोई श्यामवर्णी कोई गौर वर्णी,

कोई शांतभावी कोई क्रोधकर्णी,

सभी मित्र बनकर करें काम मिलकर,

कोई हो नवागत तो कोई पुराना,

          बने कार्यकर्ता ............।।1।।


न पूर्वाग्रही हो न हो आत्मभावी, 

ह्मरदयमन खुला हो विवेकी स्वभावी।

विचारों में स्थिरता वचन में मधुरता,

परायो व अपनों की निंदा से बचना।

          बने कार्यकर्ता ............।।2।।


उमंगी रहे हम उमंगी हो साथी,

गति भी रहे आपसी मेल खाती।

अकेले ना हो हम यही ध्यान हरदम,

कदम से कदम को मिलाकर ही चलना।

          बने कार्यकर्ता ...........।।3।।





हो चिंतन हमारा सदा दूरगामी,

मगर कार्यशैली हो एक एक कदमी।

सभी काम भारी हो परिणामकारी,

सफलता मिलेगी यही भाव भरना।

          बने कार्यकर्ता ...........।।4।।



वाचन मनन और अनुभव कथन से,

रखे अद्यतन ज्ञान बौद्धिक यतन से।

सदा स्वस्थ हो और रहे व्यस्त भी हम,

समयदान क्षमता बढ़ाते ही रहना।

          बने कार्यकर्ता ............।।5।। 


स्वयंसेवकों का यही एक सपना,

बने कार्यकर्ता बढे देश अपना।

14 अगस्त, 2021

गीत - कृण्वन्तो विश्वमार्यम्


 



राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शाखा और आर्य समाज की आर्य वीर दल में गाया जाने वाला गीत है ये कृणवंतो विश्वमार्यम।


 एक साथ उच्चार करें, हम ऐसा व्यवहार करें।

एक मन्त्र का घोष करें, कृण्वन्तो विश्वमार्यम्।। टेक।।



आज नहीं प्राचीन समय से वेद हमारा साथी।

दूर दूर तक फैलाई थी वैदिक धर्म की ख्याति।

किन्तु चक्र जब घूम पड़ा तो लक्ष्य हुआ था ओझल।

जाग उठी अब दृष्टि हमारी नहीं रही है अब बोझल।। 1।।



वेद और उपनिषत् सिखाते जो गन्तव्य हमारा।

रामायण गीता सिखलाती शुभ कर्तव्य हमारा।

मिले विश्व में दूर दूर तक वैदिक संस्कृति के अवशेष।

प्रेरित करते रहे सदा ही देकर जागृति का संदेश।। 2।।



खण्ड खण्ड क्यों आज हो रही भारत भूमि कल्याणी।

धर्म विमुख क्यों आज हो रहे आर्यधर्म के अभिमानी।

कार्य हमें ऐसा करना फिर भारतवासी नेक बनें।

संगच्छध्वं धर्मो रक्षति ऋषियों का सन्देश सुने। 3।।



अखिल विश्व में एक बार फिर उन्नत ओ3म् ध्वजा डोले।

अखिल विश्व में एक बार फिर वैदिक धर्म की जय बोले।

वेदों के अनुशीलन से हम नित्य नए आविष्कार करें।

एक बार जगति का मानव भारत का जयकार करे।। 4।।


धन्यवाद!



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राष्ट्र की जय चेतना का गान वंदे मातरम्

गीत - राष्ट्र की जय चेतना का गान वंदे मातरम्  राष्ट्र की जय चेतना का गान वंदे मातरम्,  राष्ट्रभक्ति प्रेरणा का गान वंदे मातरम्।।  वंदे मातरम...